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बलरामपुर:स्कूल के मैदान में गोशाला बनाने का आदेश, विरोध में उतरे शिक्षक और विद्यार्थी

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में राज्य सरकार द्वारा एक सरकारी स्कूल के मैदान में गोशाला बनाए जाने के आदेश को लेकर विवाद शुरू हो गया है. जिला प्रशासन ने शनिवार को स्कूल को सूचित किया कि अब से स्कूल के खेल के मैदान को गोशाला के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा क्योंकि यह एक सरकारी प्लॉट है. हालांकि इस फैसले का बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हो गया है.

समाजसेवी हारून खां के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर गोशाला का निर्माण अन्यत्र किए जाने की मांग की. विद्यालय प्रबंधक रजीउद्दीन का कहना है कि पशु आश्रय स्थल निर्माण के लिए जो भूमि चिह्नित की गई है, वह खेल मैदान है. यहां पशु आश्रय स्थल बन जाने से खेल प्रतिभाओं का विकास रुक जाएगा. हारून खान ने कहाकि वर्ष 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी ने मैदान विद्यालय को दान दिया था. तबसे यहां बच्चे खेलकूद का अभ्यास करते हैं. बड़ी संख्या में मैदान में एकत्र बच्चों व अभिभावकों ने एकस्वर में पशु आश्रय स्थल अलग बनवाने की मांग की.

वहीं पंचपेड़वा क्षेत्र के लेखपाल रमेश चंद्र ने कहा, ‘यह जमीन ग्राम सभा की है और हमने इसे मापा है. अगर स्कूल ने जमीन खाली करने से इनकार किया तो हम स्कूल के खिलाफ पुलिस में शिकायत  दर्ज करेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘तुलसीपुर उपविभागीय मजिस्ट्रेट विशाल यादव ने दावा किया कि यह जमीन वर्षों से खाली पड़ी थी इसलिए स्कूल इसे इस्तेमाल कर रहा था. कई स्कूल ऐसा करते हैं, बच्चे अक्सर पास के मैदान में खेलना शुरू कर देते हैं. यह जमीन स्कूल की नहीं है.’

यादव ने कहा कि स्कूल के प्रिसिंपल का मूल उद्देश्य जमीन हड़पना है. इस मुद्दे पर पूछने पर स्कूलों के जिला निरीक्षक महेंद्र कुमार ने कहा कि वह इससे वाकिफ नहीं है. उन्होंने कहा कि इस तरह के विवाद उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते.

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