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विवेक तिवारी हत्याकांड में गाड़ी के जरिए यूपी पुलिस को बचाने की कोशिश का क्या है सच

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 28 सितंबर को पुलिस की गोली लगने से हुई विवेक तिवारी की मौत के बाद हर दिन यूपी पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं. कभी सीसीटीवी तो कभी बदलते बयान जैसी बातों से हर बार पुलिस पर सवालिया निशान लग रहे हैं. अब ऐसे में सोशल मीडिया पर मृतक विवेक की गाड़ी को लेकर सवाल होने लगे हैं. हत्या के दिन और उसके एक दिन बाद की तस्वीरों ने उंगली दोबारा यूपी पुलिस की तरफ उठा दी है. दावा है कि यूपी पुलिस की तरफ से आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है.

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में ये अलग-अलग वक्त पर ली गई एक ही गाड़ी की तस्वीर है. पहली तस्वीर रात की है. एक किनारे से तस्वीर लेने की वजह से पूरी नंबर प्लेट तो नहीं दिख रही लेकिन उसका एक हिस्सा नजर आ रहा है. गाड़ी की हेडलाइट टूटी हुई है लेकिन अपने जगह पर है और बंपर भी दिख रहा है. अब उसी गाड़ी की दूसरी तस्वीर भी देखें जो एक्सीडेंट के बाद ली गई है, लेकिन दूसरी तस्वीर में बहुत कुछ बदल गया है. नंबर प्लेट नहीं है. हेडलाइट गायब है, बंपर भी नहीं है और सामने से बॉडी का पूरा हिस्सा अंदर की तरफ घुसा है. इन दो तस्वीरों को लेकर सवाल के साथ दावा भी है. दावा ये कि यूपी पुलिस ने जानबूझ कर विवेक की गाड़ी डैमेज कर दी ताकि ये बताया जा सके कि एक्सीडेंट कितना गंभीर था.

विवेक तिवारी को गोली मारने के आरोपी कॉन्स्टेबल प्रशांत ने सफाई दी थी कि उसने लेटकर आत्मरक्षा में गोली चलाई थी लेकिन सीसीटीवी फुटेज में आरोपी प्रशांत और उसका साथी संदीप बाइक पर विवेक तिवारी की गाड़ी का पीछा करते नजर आए. अब ऐसे में इन दो तस्वीरों ने शक की सुई यूपी पुलिस की तरफ दोबारा घुमा दी है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यूपी पुलिस ने आरोपी कांस्टेबल को बचाने के लिए खुद ही गाड़ी को डैमेज कर दिया? कहीं ऐसा तो नहीं कि गाड़ी को डैमेज करके इस केस को उलझाने की कोशिश की गई हो?

वायरल सच की टीम ने दावों की पड़ताल का जिम्मा उठाया जिसके तहत इस बात का पता लगाना था कि दोनों तस्वीरें विवेक तिवारी की महिंद्रा एसयूवी की ही हैं या सोशल मीडिया पर दो अलग तस्वीरों को ताजा घटना से जोड़कर पेश कर दिया गया हो.

पड़ताल के तहत गोमती नगर पुलिस स्टेशन पर मृतक विवेक तिवारी की गाड़ी की जांच करने पहुंचे क्योंकि विवेक तिवारी की गाड़ी गोमती नगर पुलिस स्टेशन पर ही रखी गई है. वहां मौजूद गाड़ी में वायरल तस्वीर की ही तरह ना तो हेडलाइट है और ना ही नंबर प्लेट. सामने से गाड़ी की बॉडी का पूरा हिस्सा अंदर की तरफ घुसा है और बंपर भी नहीं था.

पुलिस के मुताबिक गाड़ी पर गोलियों के निशान हैं और गाड़ी की फारेंसिक जांच होगी. एसआईटी जांच होगी तो सब पता चल जाएगा. पड़ताल में गाड़ी का बंपर तो दिखा लेकिन हेडलाइट कहीं नहीं दिखी. आखिर हेडलाइट कहां गायब हो गई ? इस बारे में पुलिस कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं थी.

हेडलाइट के सवाल पर पुलिस का कहना है कि गाड़ी जिस कंडीशन में लाई गई उसी कंडीशन में है. मौके पर हेडलाइट थी लेकिन अब गाड़ी पर हेडलाइट नहीं है तो इस सवाल पर पुलिसवालों का कहना था कि गाड़ी लादने में क्रेन से निकाला जाने में गिर सकती है. इसके अलावा बंपर तो रखा है लेकिन हेडलाइट नहीं है इस सवाल पर भी गोलमोल जवाब देते हुए पुलिस का कहना है कि इस बारे में कोई कमेंट नहीं कर सकता हूं. यानि पुलिस का कहना था कि हो सकता है हेडलाइट गाड़ी लोड करके लाते वक्त कहीं गिर गई हो. उनको खुद इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

आखिर गाड़ी की हेडलाइट गई कहां? ये सवाल उत्तर प्रदेश के एडीजी राजीव कृष्ण से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसके बारे में मैं अभी नहीं बता सकता और इसके लिए इन्वेस्टिगेशन की जाएगी. यानि पुलिस के मुताबिक घटना को लेकर जांच जारी है और इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. इसलिए वायरल सच की पड़ताल में सोशल मीडिया पर वायरल दोनों तस्वीरें सच साबित हुई हैं लेकिन गाड़ी के क्षतिग्रस्त होने को लेकर किए जा रहे दावे पर सच या झूठ की मुहर नहीं लगाई जा सकती क्योंकि ये बेहद संवेदनशील मामला है और जांच का विषय है.

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